संजू सैमसन ने वर्ल्ड कप के करो या मरो वाले मुकाबले में 50 गेंदों पर 97 रनों की जो विध्वंसक पारी खेली,
उसने अकेले दम पर भारत को सेमीफाइनल का टिकट दिला दिया। जब एक छोर से विकेट गिर रहे थे और उम्मीदें टूट रही थीं, तब संजू ने एक चट्टान की तरह खड़े होकर हारी हुई बाजी पलट दी। उनकी इस ऐतिहासिक पारी में 8 चौके और 4 गगनचुंबी छक्के शामिल थे, जिसने पूरी दुनिया को उनकी असली ताकत का अहसास करा दिया।
इस खिलाड़ी के साथ सालों से जो अन्याय हुआ, आज भगवान ने मैदान पर खुद उसका न्याय कर दिया। मैच जिताने के तुरंत बाद घुटनों के बल बैठकर ईश्वर का धन्यवाद करना यह दर्शाता है कि संजू को अपनी मेहनत से ज्यादा परमात्मा के आशीर्वाद पर भरोसा था। उन्होंने विराट कोहली का रिकॉर्ड तोड़ते हुए वर्ल्ड कप में भारत के लिए लक्ष्य का पीछा करते हुए सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर बनाया और साबित किया कि वे किसी भी क्रम पर दुनिया के सर्वश्रेष्ठ मैच विनर हैं।
आज संजू सैमसन को वो सम्मान मिल रहा है जो आज तक शायद ही किसी खिलाड़ी को मिला हो, क्योंकि उन्होंने अपने शतक की परवाह किए बिना पहली गेंद से आखिरी गेंद तक सिर्फ भारत की जीत के लिए बल्लेबाजी की। जहाँ बड़े-बड़े सूरमा दबाव में बिखर जाते हैं, वहाँ संजू ने एक निस्वार्थ योद्धा की तरह मोर्चा संभाला और करोड़ों भारतीय फैंस का दिल जीत लिया। सेमीफाइनल में भारत की इस धमाकेदार एंट्री के असली हीरो सिर्फ और सिर्फ संजू ,सैमसन









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